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सर्वकोश
वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

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पृष्ठ 71

२. साम्प्रयोगिक अधिकरण ४५
तैः सुनियमितैर्हनुदेशे स्तनयोरधरे वा लघुकरणमनुद्गतलेखं स्पर्शमात्र-
जननाद् रोमाञ्चकरमन्ते सन्निपातवर्धमानशब्दमाच्छुरितकम्॥ १२॥
आच्छुरितक—हाथ की अँगुलियों को एक साथ मिलाकर कपोल, स्तन या अधर पर
ऐसा हल्का स्पर्श किया जाये कि शरीर रोमाञ्चित हो उठे, लेकिन क्षत न हो, और नखों के
परस्पर टकराने से चटचट शब्द बढ़े, उसे आच्छुरितक नखक्षत कहते हैं॥ १२॥
प्रयोज्यायां च तस्याङ्गसंवाहने शिरसः कण्डूयने पिटकभेदने व्याकुलीकरणे
भीषणेने प्रयोगः॥ १३॥
अवस्थानुरूप प्रयोग—जब नायिका, नायक का शरीर दबा रही हो, सिर खुजा रही हो,
मुंहासे फोड़ रही हो अथवा जब उसे कामोत्तेजित करना हो, तब इसका अत्यधिक प्रयोग होता
है। इसका प्रयोग नायक और नायिका, दोनों एक-दूसरे को उत्तेजित करने में कर सकते
हैं॥ १३॥
ग्रीवायां स्तनपृष्ठे च वक्रो नखपदनिवेशोऽर्धचन्द्रकः॥ १४॥
अर्धचन्द्र और उसका स्थान—जब गले और स्तनों पर अर्धचन्द्र के समान नखों से
चिह्न अङ्कित किया जाये तो उसे अर्धचन्द्र कहते हैं॥ १४॥
तावेव द्वौ परस्पराभिमुखौ मण्डलम्॥ १५॥
मण्डल—जब दो अर्धचन्द्र परस्पर सम्मुख अङ्कित किये जाते हैं तो उसे मण्डल
कहते हैं॥ १५॥
नाभिमूलककुन्दरवंक्षणेषु तस्य प्रयोगः॥ १६॥
नाभिमूल (पेड़ू), ककुन्दर (नितम्बगर्त) और ऊरुसन्धि (योनि) पर इसका प्रमुख रूप
में प्रयोग होता है॥ १६॥
सर्वस्थानेषु नातिदीर्घा लेखा॥ १७॥
लेखा—नखों से अङ्कित रेखा, जो बहुत लम्बी न हो, लेखा कहलाती है। इसे नायिका
के किसी भी अङ्ग में अङ्कित किया जा सकता है॥ १७॥
सैव वक्रा व्याघ्रनखकमास्तनमुखम्॥ १८॥
व्याघ्रनख—यदि लेखा स्तन के मुख (चूचुक) से ऊपर की ओर कुछ टेढ़ी हो तो
व्याघ्रनख कहलाती है॥ १८॥
पञ्चभिरभिमुखैर्लेखा चूचुकाभिमुखी मयूरपदकम्॥ १९॥
मयूरपदक—पाँचों नखों से स्तनों को पकड़कर खींचने से स्तनों के मुख (चूचुक) पर
बनी रेखाएँ मयूरपदक कहलाती हैं॥ १९॥
तत्सम्प्रयोगश्लाघायाः स्तनचूचुके सन्निकृष्टानि पञ्चनखपदानि शशप्लुत-
कम्॥ २०॥
शशप्लुतक—समागम की प्रशंसा चाहने वाली नायिकाओं के स्तनों के चूचुकों पर
खिंची हुई पाँचों नखों की रेखाएँ शशप्लुतक कहलाती हैं॥ २०॥
स्तनपृष्ठे मेखलापथे चोत्पलपत्राकृतीत्युत्पलपत्रकम्॥ २१॥