वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१९२ वात्स्यायन-कामसूत्र
धन वसूलने की रीति—अथवा प्रच्छन्न रूप से उन युवकों से मिलाकर उनके प्रेम को
राजकीय अधिकारियों तक पहुँचा दे और फिर उन रसिकों के विरुद्ध न्यायाधिकरण में पहुँच
जाये ॥ १९ ॥
सख्यैव तु दास्या वा 'नोचितकन्याभावां सुगृहीतकामसूत्रामाभ्यासिकेषु
योगेषु प्रतिष्ठितां प्रतिष्ठिते वयसि सौभाग्ये च दुहितरमवसृजन्ति गणिका इति
प्राच्योपचाराः ॥ २० ॥
प्राच्य देश की वेश्याओं की रीति—पूर्व प्रदेशों की वेश्याएँ सखी या दासी से लड़की
का कौमार्यहरण कराकर काम के रहस्यों और योगों का अभ्यास कराती हैं। उन योगों और
कामकलाओं में दक्षता प्राप्त कर लेने पर यौवन के साथ ही उनका भाग्य भी चमक उठता है और
तत्पश्चात् युवती को वेश्याचरित के लिये स्वतन्त्र कर देती हैं ॥ २० ॥
पाणिग्रहश्च संवत्सरमव्यभिचार्यस्ततो यथा कामिनी स्यात् ॥ २१ ॥
एक वर्ष तक पत्नीव्रत का निर्वाह—जिस युवक ने वेश्यापुत्री का पाणिग्रहण किया हो
उसके साथ वह एक वर्ष सदाचारिणी बनकर रहे। तत्पश्चात् जहाँ वह चाहे या जो उसे चाहे वहाँ
स्वच्छन्दतापूर्वक भोग करे ॥ २१ ॥
ऊर्ध्वमपि संवत्सरात् परिणीतेन निमन्त्र्यमाणा लाभमप्युत्सृज्य तां रात्रिं तस्या-
गच्छेदिति वेश्यायाः पाणिग्रहणविधिः सौभाग्यवर्धनं च ॥ २२ ॥
निमन्त्रण पर उपस्थिति आवश्यक—एक वर्ष बाद भी जब पति बुलाये तब भी
वेश्यापुत्री अर्थलाभ को छोड़कर उस रात उसके साथ समागम के लिये अवश्य आये। वेश्या के
विवाह और सौभाग्यवर्धन का विषय पूर्ण हुआ ॥ २२ ॥
एतेन रङ्गोपजीविनां कन्या व्याख्याताः ॥ २३ ॥
अभिनेत्री कन्याओं की विवाह की रीति—इससे ही रङ्गमञ्च पर अभिनय करने वाली
कन्याओं की बात भी कह दी गयी है अर्थात् रङ्गमञ्च पर नृत्य और अभिनय करने वाली
कन्याओं की विवाह की भी यही रीति है ॥ २३ ॥
तस्मै तु तां दद्युर्य एषां तूर्ये विशिष्टमुपकुर्यात्। इति सुभगङ्करणम् ॥ २४ ॥
वैशिष्ट्यकथन—नट, नर्तक आदि अपनी पुत्री का विवाह उसी पुरुष से करें, जो उसके
नृत्य-गान आदि को उन्नत बनाने में सहायक हो। सुभगङ्करण प्रकरण पूर्ण हुआ ॥ २४ ॥
धत्तूरकमरिचपिप्पलीचूर्णैर्मधुमिश्रैर्लिप्तलिङ्गस्य सम्प्रयोगो वशीकरणम् ॥ २५ ॥
वशीकरण प्रकरण : वशीकरण लेप—धतूरा, काली मिर्च और छोटी पीपल के चूर्ण
में शहद मिलाकर शिश्न पर लेप करके जिस स्त्री से समागम किया जाये वह वशीभूत हो जाती
है ॥ २५ ॥
वातोद्भ्रान्तपत्रं मृतकनिर्माल्यं मयूरास्थिचूर्णावचूर्णं वशीकरणम् ॥ २६ ॥
वशीकरण चूर्ण—हवा से उड़ा हुआ पत्ता, शव पर चढ़ाया गया फूल और मोर की हड्डी
के चूर्ण का अवचूर्ण (सूक्ष्म चूर्ण) उत्तम वशीकरण है ॥ २६ ॥