वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७. औपनिषदिक अधिकरण १९३
स्वयं मृताया मण्डलकारिकायाश्चूर्णं मधुसंयुक्तं सहामलकैः स्नानं वशी-
करणम् ॥ २७ ॥
वशीकरण स्नान—स्वयं मरे हुए गिद्ध (मादा) के चूर्ण में शहद मिलाकर और आँवले
के रस के साथ उबटन की तरह लगाकर स्नान करने से भी स्त्री वशीभूत हो जाती है ॥ २७ ॥
वज्रस्नुहीगण्डकानि खण्डशः कृतानि मनःशिलागन्धपाषाणचूर्णेनाभ्यज्य
सप्तकृत्वः शोषितानि चूर्णयित्वा मधुना लिप्तलिङ्गस्य सम्प्रयोगो वशी-
करणम् ॥ २८ ॥
शिश्नलेप—थूहर की गाँठें टुकड़े-टुकड़े करके उनमें मैनशिल और गन्धक को
लपेटकर सात बार सुखाये, फिर उसका चूर्ण बनाकर शिश्न पर लेप करके जिस स्त्री से समागम
किया जाये वह वशीभूत हो जाती है ॥ २८ ॥
एतेनैव रात्रौ धूमं कृत्वा तद्धूमतिरस्कृतं सौवर्णं चन्द्रमसं दर्शयति ॥ २९ ॥
उपर्युक्त वस्तुओं के चूर्ण का रात्रि में धुआँ करने पर धुएँ से ढका चन्द्र सोने का-सा
दिखायी देता है ॥ २९ ॥
एतैरेव चूर्णैर्तानरपुरीषमिश्रितैर्यां कन्यामवकिरेत् साऽन्यस्मै न दीयते ॥ ३० ॥
वाञ्छित कन्या से विवाह की रीति—इन्हीं वस्तुओं के चूर्ण में बन्दर की विष्ठा
मिलाकर जिस कन्या पर छिड़क दी जाये, वह किसी अन्य को नहीं दी जा सकती अर्थात् वह
वशीभूत हो जाती है और प्रयोक्ता से ही विवाह करती है ॥ ३० ॥
वचागण्डकानि सहकारतैललिप्तानि शिंशपावृक्षस्कन्धमुत्कीर्य षण्मासं निद-
ध्यात् ततः षड्भिर्मासैरपनीतानि देवकान्तमनुलेपनं वशीकरणं चेत्याचक्षते ॥ ३१ ॥
देवकान्त अनुलेप—वचा की गाँठें आम के तैल में भिगोकर शीशम के तने में खोदकर
रख दे। छह मास पश्चात् निकाले। यह देवकान्त अनुलेप उत्तम वशीकरण है—ऐसा कहा
जाता है ॥ ३१ ॥
तथा खदिरसारजानि शकलानि तनूनि यं वृक्षमत्कीर्य षण्मासं निदध्यात्
तत्पुष्पगन्धानि भवन्ति गन्धर्वकान्तमनुलेपनं वशीकरणं चेत्याचक्षते ॥ ३२ ॥
गन्धर्वकान्त अनुलेप—इसी प्रकार खदिरसार (कत्था) के टुकड़ों को पतला करके
और आम के तैल में भिगोकर जिस वृक्ष के तने में छह मास के लिये रख देंगे, वे उसी के समान
सुगन्ध वाले हो जायेंगे। यह गन्धर्वकान्त अनुलेप उत्तम वशीकरण है—ऐसा कहा जाता
है ॥ ३२ ॥
प्रियङ्गवस्तगरमिश्राः सहकारतैलदिग्धा नागवृक्षमुत्कीर्य षण्मासं निहिता
नागकान्तमनुलेपनं वशीकरणमित्याचक्षते ॥ ३३ ॥
नागकान्त अनुलेप—तगर और काँगनी को मिलाकर और आम के तेल में भिगोकर
नागकेसर के तने में छह मास के लिये दबा दे। नागकान्त नामक यह अनुलेप उत्तम वशीकरण
है—ऐसा कहा जाता है ॥ ३३ ॥