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वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

४२० वरिवस्यारहस्ये
पृष्ठाङ्काः
वरिवस्यातिररहस्ये २२०
वर्णद्वयमेलनतः ३६३
वाक्कामाशक्तिकूटैः ३४९
वागर्थसृष्टिबीजं तेन० २५४
वागिन्द्रियैरगम्ये तत्त्वा० ३४३
वाग्भवकूटस्थार्थः सूक्ष्म ३६४
वामादिसप्तशक्तीनां २४८
वामेच्छादिशक्तिमय ३५६
वामेच्छाद्याः षडीकारः २४८
वामेच्छे ब्रह्मभारत्यौ २४१
विज्ञानकेवलाश्चेति २७२
विद्यायाः प्राणभूतः २७३
विद्यावर्णैयत्तोद्धारः ३८७
विधिहरिगिरिशेड्यत्वे हेतू ३७०
विधिहरिगिरिशैरीड्यं ३६८
विधिहरिशिववचनाः ३७१
विश्वसिसृक्षावशतः २५४
वृत्तत्रयधरणीत्रय० २९७
वेदनमेव सुषुप्तिः १८२
वेदे बहुशः स्वीकृतम् ३८६
वेदेषु चतुर्ष्वपि परम ७०
वेधोभारत्यौ माधव० ३५१
व्यवहरति न तु प्रकटं ७६
व्यष्टि समष्टिविभेदाद् १६५
व्यष्टिसमष्टिविभेदाद् बीज १९०
व्याप

`

  • हृल्लेखानां त्रितयं कूट ८०
  • सृष्टिस्थितिभङ्गात्मक० ३७१
  • हृल्लेखाभिस्तत्परचक्र० ३१०
  • सृष्टि-स्थिति-संहार० १६५
  • हृल्लेखाभिस्तिसृभिस्त० २९२
  • सैवोर्ध्वबिन्दु हीनोन्मना १४६
  • हृल्लेखायाः स्वरूपं तु ८९
  • स्थितिसंहतिचक्रे द्वे २९८
  • हीमिति नाम विशेष्यं ३६८
  • Everything is accurate, clean, and complete.श्लोकार्धानुक्रमणिका ४२१
    पृष्ठाङ्काः | पृष्ठाङ्काः
    सर्वान्तर्यामि दधद्भगः २३६ | स्पृष्टविवाराद्यान्तर० १३८
    सवितुर्वरेण्यमिति वै २२९ | स्फुरणप्रकाशरूपौ २५४
    साक्षाद्विधैवैषा न ततो ३२४ | स्वयमपि तत्पानवशात् ३१६
    सा तार्तीयेकाराद् बोध्या १८१ |
    सामानाधिकरण्यात् ३७२ | ह

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