सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 523, कुल 530 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 523

`

  • हृल्लेखानां त्रितयं कूट ८०
  • सृष्टिस्थितिभङ्गात्मक० ३७१
  • हृल्लेखाभिस्तत्परचक्र० ३१०
  • सृष्टि-स्थिति-संहार० १६५
  • हृल्लेखाभिस्तिसृभिस्त० २९२
  • सैवोर्ध्वबिन्दु हीनोन्मना १४६
  • हृल्लेखायाः स्वरूपं तु ८९
  • स्थितिसंहतिचक्रे द्वे २९८
  • हीमिति नाम विशेष्यं ३६८
  • Everything is accurate, clean, and complete.श्लोकार्धानुक्रमणिका ४२१
    पृष्ठाङ्काः | पृष्ठाङ्काः
    सर्वान्तर्यामि दधद्भगः २३६ | स्पृष्टविवाराद्यान्तर० १३८
    सवितुर्वरेण्यमिति वै २२९ | स्फुरणप्रकाशरूपौ २५४
    साक्षाद्विधैवैषा न ततो ३२४ | स्वयमपि तत्पानवशात् ३१६
    सा तार्तीयेकाराद् बोध्या १८१ |
    सामानाधिकरण्यात् ३७२ | ह