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बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja

महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा

DevanagariHindipublished368 पृष्ठ

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व्यासटिकाधिकरण ] [ ५१
निर्यास—गोन्द ६ भाग, रुरुक ? -वनरोहेडा २ भाग, क्षार—यवक्षार-जौखार ३ भाग या सज्जीखार
जौखार सुहागा मिश्रित ३ भाग, ओषधि ?—गेहूं ५ भाग, इङ्गाल—अङ्गारे बुझे कोयले या राख ६ भाग
सृणिकायड ? ५ भाग, शालीतुषाभस्म—शालीधान के तुषों की राख ४ भाग, शिला—दूब घास या
गेरू ? २ भाग, नागमुख ? —नागकेसर का मूल ? २ भाग, वरोलिका ?-कुन्दपुष्प सुहागा ५ भाग, बाल—
सुगन्धवाला २ भाग, रस ? सिन्दूर या शङ्करफ ५ भाग, गुञ्जा—घूंघची ( सफेद घूंघची ? ) २ भाग,
समुद्रफेन ४ भाग। इन्हें मिलाकर पेषणीयन्त्र-चक्की के अन्दर डाल वे अत्यन्त सूक्ष्म कोमल शुद्ध पीस
कर उसमें गोन्द और मृत्तिका ५ भाग, पोली मिट्टी बराबर अंश मिलाकर पाचक—पकानेवाले यन्त्र से
शिवारितैल ? से तीन पहर पकावे. पाक को देखकर अच्छे पके हुए को मूषा बोतल में नालमुख से भर
दे । ऐसा करने