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बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja

महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा

DevanagariHindipublished368 पृष्ठ

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( ग )
विषय पृष्ठ
विमान के मार्ग में आई सूर्यकिरणों को स्वाधीन करके विमान को निर्बाध गतिशील
करता है ॥ ८५ - ६६
कापी संख्या ७—
द्रावक तारों पर लपेटने के लिए गेण्डे आदि चर्म का विधान। वातसंयोजक,
धूमप्रसारण आदि यन्त्रों का निर्माण । ३२ मणिवर्गों के १२ वें वर्ग में कही १०३
मणियों का विमान में सूर्यकिरणाकर्षणार्थ उपयोग लेना । परिवेषक्रियायन्त्रद्वारा विमान
में वातसंयोजन धूमप्रसारण सूर्यकिरणाकर्षण आदि व्यवहार ॥ १००-११०
कापी संख्या ८—
ग्रहों के चार अतिचार आदि विरोधी गतियों के संघर्ष से आकाश में बहती
हुई विषशक्ति के आक्रमण या प्रभाव से विमान के अङ्गों को निष्प्रभाव रखने के लिए
अङ्गोपसंहारयन्त्र का विधान तथा भूगर्भ से उद्भूत और पृथिवी की बाह्यकक्षाओं से
प्रकट हुए अनिष्टों के निवारणार्थ विस्तृतास्यक्रियायन्त्र का स्थापन । शत्रुओं पर कृत्रिम
विविध धूमप्रकाश को वैरुप्यदर्पणद्वारा फेंक कर उन्हें विरूप करना मूर्च्छा आदि भिन्न
भिन्न रोगों में ग्रस्त करना ! आकाशीय वातावरण से विमान के अङ्गों तथा विशेषत
उपरि अङ्गों में शिथिलता आ जाने और उनपर मल लिप्त होजाने से बचाने को पद्मपत्र-
मुखयन्त्र का विधान ॥ १११-१२७
कापी संख्या ६—
ग्रीष्मकाल में उष्णकिरणों के मेल से कुलिका नाम की शक्ति विमान को
भस्म कर देने वाली उत्पन्न हो जाती है उसे कुण्टिणीशक्तियन्त्र के विविध अङ्गोंद्वारा
पी लिये जाने का वर्णन, तथा ग्रीष्म में विषयुक्त पञ्चशिखा नाम की घातिका शक्ति
उत्पन्न हो जाती है जो कि प्राणियों के जीवनरस का शोषण एवं अनेकविध रोगों का
निमित्त है उसे नष्ट करने के लिये पुष्पिणीयन्त्र (पुष्पाकार अरायन्त्र) लगाना, जो कि
उसके विषयुक्तप्रवाहों को बाहिर निकाल देता है। दो वायुओं के आवर्त्त--चक्रधूम
एवं सूर्यकिरणों के संसर्ग से वज्रसमान विद्युत् का पतन हो जाया करता है उससे बचने
के लिये पिञ्जुलादर्शयन्त्र का विमान में लगाना ॥ १२८-१४५
कापी संख्या १०--
शत्रु के द्वारा भूमि में दबाए--छिपाए हुए महागौलाग्नियन्त्र का गुहागर्भादर्श
यन्त्र ( दूरबीन जैसे यन्त्र) द्वारा सूर्यकिरणों (ऐक्सरे की भांति) पकड भूमि में प्रविष्ट कर
निर्यासपट पर प्रतिबिम्ब (फोटो) लेलेना ॥ १४६-१५४
कापी संख्या ११--
शत्रु पर अन्धकार फैलाने वाला तमोयन्त्र । आकाशीय १३ वातावरण में हुए