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बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja

महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा

DevanagariHindipublished368 पृष्ठ

पृष्ठ 105, कुल 368 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 105

).

  • Line 33:
    पश्चात् पारद्रवे सम्यक् तच्छक्ति सम्प्रवेशयेत् ॥ १०८ ॥
    Notice तच्छक्ति (no bindu).
  1. Double check Line 6 word रुचिद्रावक-सञ्जो...:
    • Wait, is it सञ्जोच्चार?
    • Let's re-examine that word:
      रुचिद्रावक-सञ्जोच्चार के द्रावक की मणि के मूल से
      Wait, in line 6: सञ्जो...
      Wait, could it be सञ्जोच्चार?
      Wait, let's look at the letters:
      स
      ञ्जो
      च्चा or वा?
      Wait! In line 15: विधिवच्छक्तिद्वयमत -> look at च्छ.
      In line 6: look at the glyph after ञ्जो:
      It's a व? No, wait! Is it सञ्जोच्चार or सञ्जोचार?
      Wait, look at च्चार: च has a loop? No, च has a flat top, curved bottom.
      Wait, look at the glyph: does it look like च्चार?
      Wait, could it be `सञ्जो