विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)
Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan
केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रकरणम्-१२ ] वसन्तलक्ष्मीसहितम् । ८५
अथाष्टमस्थानस्थग्रहाणां फलानि-
सितसितकिरणेज्या मृत्यवे मृत्युवेश्म-
न्यनवरतसुखायुःसम्पदे सूर्यसौरी ।
भवति पतिशरीरद्रोहकृद्रौहिणेयो
द्रुहिणगृहमुखीनां यक्ष्मणे क्षोणिजन्मा ॥ ८ ॥
सं०-मृत्युवेश्मनि अष्टमस्थाने सितसितकिरणेज्याः द्रुहिणगृहमुखीनां
कमलवदनानां स्त्रीणां मृत्यवे मरणाय भवन्ति । सूर्य-सौरी अनवरतसुखायुः-
सम्पदे भवतः । रौहिणेयो बुधः पतिशरीरद्रोहकृद् भवति । क्षोणिजन्मा
कुजः यक्ष्मणे राजयक्ष्मरोगाय भवति ॥ ८ ॥
भा०-विवाह लग्न से अष्टम स्थान में शुक्र, चन्द्र, बृहस्पति हों तो स्त्रियों
के मृत्युकारक होते हैं । सूर्य और शनि सदा सुख-आयु-सम्पत्ति देते हैं । बुध
स्वामी के शरीर में आघात करनेवाला होता है । और मङ्गल अष्टम स्थान में हो
तो यक्ष्मारोगकारक होता है ॥ ८ ॥
अथ नवमस्थानस्थग्रहाणां फलानि-
शशिसुतगुरुशुक्राः सान्द्रसौभाग्यलीलां
सरलहसितकान्तस्वान्तकेलिं कुमारीम् ।
रविरविसुतवक्राः कैतवाक्रान्तशीलां
तपसि तुहिनरश्मिः स्त्रीसवित्रीं करोति ॥ ६ ॥
सं०-तपसि नवमस्थाने शशिसुत-गुरु-शुक्राः कुमारीं सान्द्रसौभाग्य-
लीलां सरलहसितकान्तस्वान्तकेलिं च कुर्वन्ति । रवि-रविसुत-वक्राः
कैतवाक्रान्तशीलां ( कपटयुक्तस्वभावां ) कुर्वन्ति । तुहिनरश्मिश्चन्द्रः स्त्री-
सवित्रीं ( कन्याप्रसवां ) करोति ॥ ९ ॥
भा०-विवाहलग्न से नवम भाव में बुध, गुरु, शुक्र हों तो अत्यन्त सौभाग्य-
वती और सरल हास्य से स्वामी के हृदय में केलि करनेवाली कन्या होती है ।
सूर्य, शनि, मंगल ये हों तो कपट स्वभाववाली, और चन्द्रमा नवम भाव में हो
तो स्त्री को कन्या सन्तानवाली बनाता है ॥ ९ ॥