विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)
Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan
केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 89, कुल 138 में से
संदर्भ में पढ़ें( गोचरविधिना स्त्रीणां गुरुसूर्यबलालाभे ) सति अपरेऽन्ये अष्टवर्ग-
विधिना नृणां वराणां सूर्यशुद्धिं जगुः ॥ ५ ॥
भा०—गोचर विधि से स्त्रियों के गुरुबल और सूर्यबल प्राप्त होने पर विवाह
शुभ है । यदि गोचर विधि से गुरुबल और सूर्यबल प्राप्त नहीं हो तो अष्टवर्ग
विधि से पुरुष का ही रविबल ग्रहण करना अन्य आचार्यों ने कहा है ॥ ५ ॥
अत्र गोचरस्यैव कथं मुख्यतेति कथयति—
अष्टवर्गफलमेव जातके नास्य किं परिणयेपि मुख्यता ।
सत्यमुद्वहनजन्मशास्त्रयोरन्यथा मुनिभिरेव संस्मरे ॥ ६ ॥
सं०—जातके होराशास्त्रे अष्टवर्गफलमेवास्ति, अतः परिणये वि-
वाहेऽपि अस्य अष्टवर्गफलस्य मुख्यता किं न स्यात् ? इति सत्यम्, उद्वहन-
जन्मशास्त्रयोः विवाहजातकशास्त्रयोः अन्यता ( भिन्नता ) मुनिभिरेव
संस्मरे स्मृतेत्यर्थः ॥ ६ ॥
भा०—जातकशास्त्र में अष्टवर्ग से ही फल कहा गया है, इसलिये विवाह में
भी इस ( अष्टवर्ग फल ) की मुख्यता क्यों न हुई ? यह सत्य है; परञ्च मुनियों
ही ने जातकशास्त्र और विवाह में भिन्नता कही है ॥ ६ ॥
अत्रोदाहरणं कथयति—
क्रूरमष्टममरिष्टमिष्टदं सप्तमं शुभमुशन्ति जन्मनि ।
नेयमुद्वहनरीतिरित्यसावत्र गोचरपथो रथोद्धतः ॥ ७ ॥
सं०—जन्मनि जन्मकाले ( जातके ) अष्टमं क्रूरं पापग्रहं अरिष्टदं
( अशुभप्रदं ) सप्तमं सप्तमस्थानस्थं शुभं शुभग्रहं इष्टदं ( शुभप्रदं ) उशन्ति
कथयन्ति । इयं उद्वहनरीतिः ( विवाहविधिः ) न भवति । इत्यस्मात्
कारणात् अत्र ( विवाहे ) असौ गोचरपथः रथोद्धतः ( रथैरुद्धत उद्घृष्टः
परम्परागतः स्फुट एवेत्यर्थः ) ॥ ७ ॥
भा०—जातकशास्त्र में अष्टम पापग्रह शुभप्रद, और सप्तम शुभग्रह शुभप्रद
है । परञ्च यह विवाह की रीति नहीं है, अर्थात् विवाह में अष्टम पाप और सप्तम
शुभग्रह भी अशुभ ही है । इसलिये विवाहमें यह गोचरविधि परंपरागत स्पष्ट है ॥