विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)
Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan
केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रकरणम् ७ ] वसन्तलक्ष्मीसहितम् । ४७
तथैव तारकापि शशिनश्चन्द्रस्यानुकूलताऽसम्भवे पक्षपातिनी भवति ।
अतः कृष्णपक्षेऽपि चन्द्रानुकूलत्वे एव ताराबलं ग्राह्यमिति सिद्धम् ॥११॥
भा०—दुर्बल भी अपना पति समीप में रहता है तो स्त्री उसके इच्छानुसार
ही कार्य करती है । इसी प्रकार तारा भी चन्द्रमा के अनुकूलता अभाव होने पर
चन्द्रमा ही की पक्षपातिनी होती है । अर्थात् कृष्णपक्ष में भी चन्द्रमा प्रतिकूल
रहता है तो तारा भी अशुभ फल को ही देती है । और चन्द्रमा के शुभ स्थान
स्थित होने पर शुभ फल देती है । इससे सिद्ध हुआ कि कृष्णपक्ष में भी चन्द्रमा
को अनुकूल स्थान में ही रहना चाहिये ॥११॥
अथ राहुसत्ताध्यायः ।
तत्रादौ वराहमिहिरमतं दूषयति—
यद्वराहमिहिरो न राहुरित्याह ताण्डवितबाहुरुच्चकैः ।
संहितास्मृतिसहायिनी वहत्यत्र तत्पथविमाथिनी श्रुतिः ॥ १ ॥
सं०—'राहुः न' इति उच्चैस् ताण्डवितबाहुः (