विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)
Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan
केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished138 पृष्ठ
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३४ विवाहवृन्दावनम्- [ नवांशचिन्ता-
भा०—उद्गगतनवांश का स्वामी नवांश से अथवा लग्न से ३, ८, १२, २*
इन स्थानों में हो तो वर का नाश करता है । यदि नवांश का सप्तमेश नवांश-
सप्तम से वा लग्न सप्तम से ३, ८, १२, २, में हो तो कन्या का नाश करता है ।
उभयहक् फलदा बलदाढ्य॑तो लवदृगुद्वहते क्रियदूनताम् ।
तदिह केवललग्नदृशः फलं शकलितं कलितं यवनेश्वरैः ॥१०॥
सं०—उभयदृक् ( उभयस्य = लग्नस्य, नवांशस्य च दृष्टिः ) बल-
दाढ्यंतो ( बलदृढ़त्वात् कारणात् ) फलदा ( विशिष्टफलप्रदा ) स्यात् ।
लवदृग् ( केवलनवांशदृष्टिः ) क्रियदूनतां ( किञ्चिन्न्यूनतां ) उद्वहते ।
तत् ( तस्मात् ) इह ( विवाहे ) केवललग्नदृशः फलं यवनेश्वरैः शकलितं
( खण्ड