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सर्वकोश
विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan

केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished138 पृष्ठ

पृष्ठ 32, कुल 138 में से

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पृष्ठ 32

) तदा निविडा
Wait, in line 18: "ऋक्षं ( नक्षत्रं )" or "नक्षत्रं"? It's "नक्षत्रं".

Line 19:
प्रीतिः ( अतिशयं प्रेम ) भवति । एकराशौ चेत् कृत्तिकारोहिणिवत्

Line 20:
'भिन्नमृक्षं' तदा नाडी न स्यात् ( नाडीदोषो न भवतीत्यर्थः ) यथाह
Single quotes around भिन्नमृक्षं?
Yes, 'भिन्नमृक्षं'.

Line 21:
भृगुः—"दम्पत्योरेकराशिश्चेत् पृथगृक्षं यदा भवेत् ।"
Double quotes around the quote?
Yes, "दम्पत्योरेकराशिश्चेत् पृथगृक्षं यदा भवेत् ।"

Line 22:
वशिष्ठोक्तो विवाहः स्याद् गणं नाडीं न चिन्तयेत् ॥ ३ ॥
Wait, does it have double quotes at the end?
No, the quote continues from भृगुः, but line 22 doesn't have a closing quote, or maybe line 21 had it closed at the end of the line: "भवेत् ।""?
Look at line 21: भृगुः—"दम्पत्योरेकरा