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सर्वकोश
विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan

केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished138 पृष्ठ

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पृष्ठ 31

१८ विवाहवृन्दावनम्— [मेलक-
नास्ति तदा अणूनां सूक्ष्मभागानां दुर्गमत्वात् तदुभयलवनाशः स्यात् । इति
कालमीमांसया ( समयविवेकेन ) नः ( अस्माकं ) परिणतिः रूढा । अतो
राश्योरनुकूलत्वे एव नवांशानुकूलत्वं विचार्यमिति सिद्धम् ॥ ९ ॥
भा०—इस प्रकार मूल के अनुकूल रहने पर यदि सूक्ष्म भाग भी लब्ध हो
जाय तो सर्वथा सिद्ध है । और यदि मूल ( स्थूल = राशि, नक्षत्र ) ही नहीं
अनुकूल हो तब तो सूक्ष्म भाग के दुर्गम होने के कारण 'सूक्ष्म का भी लाभ न
होगा' तब दोनों ही नष्ट हो जायेंगे । काल की मीमांसा ( विचार ) से यही
परिणाम हुआ । अतः व्यवहार में स्थूल का ग्रहण करना ही सिद्ध हुआ ॥ ९ ॥
अथ मेलकाध्यायः ।
तत्रादौ सयुक्तिकं राशिमेलकमाह —
व्यये न वित्तं न तपस्यपत्यं नायुर्द्विषत्येव वधूवराणाम् ।
द्विद्वादशः पञ्चनवाष्टषष्ठो जन्मर्क्षयोः सख्यविधिर्न दृष्टः ॥ १ ॥
सं०—'प्राचीनैः' जन्मर्क्षयोः ( जन्मराश्योः ) द्विद्वादशः, पञ्च-
नवाष्टषष्ठः ( पञ्चमनवमः, अष्टषष्ठश्च ) सख्यविधिः ( सौहृदविधिः ) न
दृष्टः । तत्र हेतुं कथयति—यतः—व्यये ( अर्थस्यापगमे ) वित्तं ( धनं )
न भवति अतः व्यये ( द्वादशे ) वित्तं ( द्वितीयं भं ) न योज्यम् । तथा
तपसि ( ब्रह्मचर्यादिनियमे ) अपत्यं ( सन्ततिः ) न भवति, अतः तपसि
( नवमराशौ ) अपत्यं ( पञ्चमं भं ) न योज्यं, तथा च—द्विषति ( शत्रौ
सति ) आयुः ( जीवनं ) न, इत्यतः द्विषति ( षष्ठे ) आयुः ( अष्टमं भं )
न योजनीयमिति वरकन्ययोः सेव्यसेवकयोर्वा जन्मर्क्षयोः द्विद्वादशे निर्धनत्वं,
नवपञ्चमेऽनपत्यता, षट्काष्टके मरणमिति फलं स्फुटमुपपद्यते ॥ १ ॥
भा०—वर कन्या, वा सेव्य सेवककी जन्मराशियोंमें परस्पर द्वितीयद्वादश,
पञ्चमनवम, षष्ठअष्टम में मैत्रीविधान ( मेल ) नहीं कहा गया है । उसकी युक्ति
श्लोकके पूर्वार्धसे कहते हैं कि—व्ययमें ( खर्च होनेपर ) धन नहीं रहता है, और
तपस्या में (तपश्चर्याके नियममें रहनेपर) अपत्य ( सन्तान ) नहीं हो सकता तथा
शत्रुओंके बीच आयु ( जीवन ) नहीं रहता है । इसलिये व्यय ( द्वादश ) के साथ
धन ( द्वितीय राशि ) का और तप ( नवम ) के साथ अपत्य ( पञ्चमराशि ) का,
एवं द्विषत् ( षष्ठ ) के साथ आयु ( अष्टमराशि ) का मेल शुभ नहीं है ॥ १ ॥