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सर्वकोश
विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan

केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished138 पृष्ठ

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पृष्ठ 17

५ विवाहवृन्दावनम् । [ नक्षत्रशुद्धि-
भा०—वात्स्य आदि अन्य आचार्यों ने वर्षा और वसन्त ऋतु, कार्तिक तथा
मार्गशीर्ष विवाह में विहित कहा है । परन्तु उनका यह मत ठीक नहीं है । क्यों
कि मीन को छोड़कर सूर्य का उत्तरायण काल ही स्त्रियों के विवाह में अत्यन्त
श्रेष्ठ है । ऐसा बहुत मुनियों का सम्मत है । अर्थात् अल्पसम्मति होने के कारण
वर्षाऋतु विवाह में त्याज्य है ॥ ५ ॥
अथ विवाहे पञ्चशलाकावेधमाह—
याम्योत्तराः प्रागपराश्च पञ्च द्वे द्वे च रेखे रचयेद्विदिक्षु ।
विदिग्द्वितीयार्गलिताग्नितारः सहाभिजित् तत्र भवेद्भवर्गः ॥ ६ ॥
सं०—पञ्च याम्योत्तराः, पञ्च प्रागपराश्च रेखाः, द्वे द्वे रेखे च
विदिक्षु ( कोणेषु ) रचयेत् । तत्र ( तस्मिन् चक्रे ) विदिग्द्वितीयार्गलिता-
ग्नितारः ( विदिशि द्वितीया 'रेखया'ऽर्गलिता बद्धाऽग्नितारा कृत्तिका
यस्य स तथोक्त