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सर्वकोश
विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan

केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished138 पृष्ठ

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पृष्ठ 133

१२० विवाहवृन्दावनम्— [ लग्नशुद्धि-

देशान्तरपलानि ऋणानि, पश्चिमदेशान्तरपलानि धनानीत्यर्थः । तथा
त्रिंशद्-द्युमानान्तरमर्धितं चरार्धं स्यात् । ततः "चरार्धदेशान्तरयुग्वि-
योगौ" इत्यादिषड्वर्गाध्यायोक्तप्रकारेण वारप्रवृत्तिर्ज्ञेया ॥ १४ ॥
भा०—उज्जयिनी से पूर्व और पश्चिम देशान्तर योजन में अपना चतुर्थांश
घटाने से देशान्तर पल होता है । वह पूर्व में ऋण, पश्चिम में धन समझना । तथा
३० और दिनमान के अन्तर को आधा करने से चरखण्ड होता है । यह दिनमान
३० से अधिक हो तो धन, अल्प हो तो ऋण समझना । फिर इसके द्वारा
षड्वर्गाध्यायोक्त विधि से वारप्रवृत्ति साधन करना ॥ १४ ॥
अथ प्रकारान्तरेण कालहोरामाह—
द्विघ्नेष्टनाडीशरलब्धितो वा स्युः कालहोरादिनपप्रवेशात् ।
प्राग्वच्छरघ्ना गणयेदनिन्द्या क्रूरापि लग्ने शुभवेदवर्गे ॥१५॥
सं०—दिनप्रवेशात् द्विघ्नेष्टनाडीशरलब्धितो वा 'प्रकारान्तरेण'
कालहोराः स्युः । ताः शरघ्नाःपञ्चगुणिताः प्राग्वत् 'वारेशादिक्रमात्' गण-
येत् । शुभवेदवर्गे ( शुभाः वेदाश्चत्वारो वर्गा यस्मिन् तन् शुभवेदवर्गं
तस्मिन् तथोक्ते) लग्ने सति क्रूरोपि होरा अनिन्द्या स्यात् ॥ १५ ॥
भा०—वारप्रवेश समय से इष्टघटी को २ से गुनाकर ५ के भाग देने से लब्धि
कालहोरा होती है । उसे ५ से गुनाकर वारेशक्रम से पूर्ववत् गणनाकर रव्यादि
ग्रहों की होरा समझना । यदि लग्न के षड्वर्ग में ४ शुभग्रह के वर्ग हों तो
पापग्रह की होरा भी अशुभ नही होती है ॥ १५ ॥
अथ षड्वर्गान् कथयति—
राश्यंशाः शशिभूगुणैणतनहतास्तिथ्यभ्रभूदिक्खरै-
र्भक्ता भार्धदृकाणनन्ददिनकृद्भागा गृहं यस्य यत् ।
त्रिंशांशः सितसौम्यजीवरविजक्ष्माजन्मनां व्युत्क्रमा-
दोजर्क्षेषु शरेषुसर्पमरुतः पञ्चेति षड्वर्गिका ॥१६॥
सं०—श्लोकोऽयमष्टमाध्याये व्याख्यातः ( द्र० अ० ८ श्लो० १३ ) ॥
भा०—षड्वर्गप्रकरण के १३ वाँ श्लोक में इसकी व्याख्या देखो ॥ १६ ॥
अथ सुखार्थं स्थूलदिनमानसाधनमाह—
मध्योदये सायनसूर्यभोग्यं सषड्भयुक्तं च युतं द्युमानम् ।