विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)
Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan
केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रकरणम् १७ ] वसन्तलक्ष्मीसहितम् । ११५
त्रिंशद्गुणान्यगलितोदयभाजितानि
भागाद्यजादिगृहशेखरितं तनुः स्यात् ॥१२॥
सं०—रवेः पलात्मकं भोग्यं समयं ‘तदग्रिमै.’ उदयैः सह इष्टघटी-
पलेभ्यः त्यक्त्वा, तदुद्धृतानि ( तदुबर्वरितानि ) पलानि त्रिंशद्गुणानि
अगलितोदयभाजितानि ( अगलितेन अशुद्धोदयेन भाजितानि ) भागादि
यल्लब्धं तदजादिगृहशेखरितं ( शेखरे शिरोभागे मेषादिराशियुक्तं ) तनुर्लग्नं
भवति ॥ १२ ॥
भा०—सूर्य के भोग्यांशवश भोग्यपल साधन कर अग्रिमराशियों के उदय
मान सहित उन भोग्यपलों को इष्ट घड़ी के पल में घटावे, जो शेष पल बचे
उसको ३० से गुनाकर अशुद्धराशि के उदय का भाग देकर लब्ध अंशादिकों के
ऊपर ( आदि में ) मेषादिराशि जोड़ने से लग्न हो जाता है ॥ १२ ॥
अथ होरानवांशज्ञान