विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)
Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan
केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रकरणम् १५ ] वसन्तलक्ष्मीसहितम् । १११
इस शौनकवचन के विरोधभय से “कुजोऽसुरमहेज्यबुधौ” इस प्रकार का पाठ
बनाया है । उस प्रकार से भी शुक्र के फल में पुनरुक्ति दोष आता है । क्योंकि
यहाँ आचार्य केशवार्क ने सप्तमस्थ सूर्येतर सब ग्रहों का फल कहा है ॥५॥
अथ दलनकण्डनादिकार्येषु शुभकालं कथयति —
भतिथिवारफलानि पदे पदे विरचितानि परैरिति नोचिरे ।
सकलकर्मसु यस्तदुपक्रमः स हि विवाहभ एव शुभे दिने ॥ ६ ॥
सं० — सकलकर्मसु ( दलनकण्डनादिसमस्तविवाहाङ्गकृत्येषु ) परैर-
न्याचार्यैः भतिथिवारफलानि पदे पदे विरचितानि, इत्येवं प्रकारेणात्र
नोदिरेऽस्माभिर्नोक्तानीत्यर्थः । हि यतः यस्तदुपक्रमः ( तेषां दलनकण्ड-
नादिसकलकर्मणां उपक्रमः ) स शुभदिने विष्टिमहापातादिदोषरहितदिवसे
विवाहभे विवाहविहितनक्षत्र एव स्यात् । तथा च श्रीपतिः — “विवाहकृत्यं