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सर्वकोश
विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan

केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished138 पृष्ठ

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पृष्ठ 121

१०८ विवाहवृन्दावनम्- •[ प्रश्न-
निष्पादिताः ) अशुभं घ्नन्ति नाशयन्ति । अतः शच्याः, मातृकाणां, कुल
देवतानां चाराधनमवश्यमेव कर्तव्यमिति तात्पर्यम् ॥३२॥
भा०-सुवासिनी स्त्री सहित कन्या शौनकादिकथित विधि से शची की पूजा
करे । और गौरी आदि षोडशमातृका तथा माता मातामही आदि माताओं का
यज्ञ ( पूजनादि ) तथा कुलाचारानुसारशान्ति ( कुलदेवतापूजनादि ) ये विघ्नों को
नाश कर देते हैं। इसलिये इन कर्मों को मंगलकार्यों में अवश्य करना चाहिये ॥

अथ वधूवरप्रश्नाध्यायः ।
तत्रादौ वधूप्रश्नमाह-
कर्मायसूनुसहजस्मरगो मृगाङ्कः
स्त्रीपुंससंगमयिता यदि जीवदृष्टः ।
स्वर्क्षाणि शुक्रशशिदृष्टयुतानि कन्या-
लब्ध्यै वधूगृहदक्काणनवांशका वा ॥ १ ॥
सं०-प्रश्नलग्नात् कर्मायसूनुसहजस्मरगो मृगाङ्कश्चन्द्रो यदि जीव-
दृष्टस्तदा स्त्रीपुंससंगमयिता वधूवरसंगमकारको भवतीत्यर्थः । शुक्रशशि-
दृष्टयुतानि स्वर्क्षाणि ( शुक्रशशिनोः स्वगृहाणि ) लग्नगतानि, वा वधूगृह-
दृक्काणनवांशकाः (वधूगृहाणि समराशयस्तेषां दृक्काणनवांशकाः लग्नगताः)
कन्यालब्ध्यै कन्यालाभाय भवन्ति ॥ १ ॥
भा० - वरकन्यालाभार्थ प्रश्नलग्न से १०, ११, ५, ३, ७ इन स्थानों में
चन्द्रमा हो और बृहस्पति से दृष्ट हो तो वधूवरसंगमकारक होता है । अर्थात् वर
के लिये कन्या और कन्या के लिये वर मिलता है । तथा शुक्र और चन्द्रमा की
राशि ( वृष, तुला, कर्क ये ) लग्न हो और शुक्र चन्द्रमा से दृष्ट युत हो, वा
समराशि ( वृष आदि ) के द्रेष्काण, नवांश लग्नगत हो और शुक्रचन्द्र से दृष्ट युत
हो तो कन्यालाभ होता है ॥ १ ॥
युग्मर्त्तगौ शशिसितौ द्विपदाङ्गनांशे
स्यातान्तदासिपिशुनौ तनुमीक्षमाणौ ।
नारीनवांशमुदितं खचराः परेपि
स्त्रैणर्त्तगा विलसदुज्ज्वलवीर्यभाजः ।। २ ।।