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सर्वकोश
विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan

केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished138 पृष्ठ

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पृष्ठ 119

१०६ विवाहवृन्दावनम्- ˚ [ मिश्र-
अथ शुनश्चेष्टितं कथयति-
शूनो गतिर्दक्षिणेष्टा कुमारी यत्र कांक्षिणी ।
अदक्षिणा यत्र तत्र वर एतां वुवूर्षति ॥२८॥
सं०-यत्र यस्मिन् समये कुमारी कांक्षिणी भवति ( वरं वरीतुमि-
च्छतीत्यर्थः ) तस्मिन् समये शुनः कुक्कुरस्य दक्षिणा ( स्वदक्षिणभागगता )
गतिः इष्टा शुभप्रदा स्यात् । यत्र वरः एतां कुमारीं वुवूर्षति वरीतुमिच्छति
तत्र अदक्षिणा शुनोर्गतिरिष्टा भवति ॥ २८ ॥
भा०- जिस समय कन्या वरका वरण करै उस समय दाहिने भाग होकर
कुकर का चलना शुभ है। और जिस समय वर कन्या का वरण करै उस समय
वाम भाग कुकर का जाना शुभ होता है। अर्थात् इससे विपरीत अशुभ समझना ।
अथोपश्रुतिशकुनं कथयति -
आरोप्याक्षतपूरिते गणपतिम्प्रस्थादिपात्रे शनैः
संमार्जन्यववेष्टिते युवतयस्तिस्रः सकन्या निशि ।
निर्याता रजकादिवेश्मसु करे कृत्वा तमभ्यर्चितं
यां वाचं शृणुयुस्तदर्थसदृशी सिद्धिः किलोपश्रुतौ ॥२६॥
सं०-अक्षतपूरिते तण्डुलपूर्णे संमार्जन्यववेष्टिते प्रस्थादिपात्रे 'प्रस्थ-
कुडवादिमानपात्रे' गणपतिं गणेशमूर्तिं आरोग्य, अभ्यर्चितं संपूजितं तं
गणपतिं करे कृत्वा सकन्याः कन्यया सहितास्तिस्रः युवतयः सुवासिन्यः
निशि रात्रौ रजकादिवेश्मसु निर्याताः तत्र यां वाचं शृणुयुः तदर्थसदृशी
सिद्धिः उपश्रुतौ ज्ञेया किलेति निश्चयार्थकम् ॥ २९ ॥
भा०-चावल से पूर्ण प्रस्थ आदि ( सेर, पौआ, आदि ) अन्न नापने के पात्र
को संमार्जनी ( बढ़नी ) से ढककर उस पर गणेशजी की प्रतिमा रखकर उनकी
पूजाकर और उन्हें हाथ में लेकर रात्रि के समय कन्यासहित तीन सुवासिनी स्त्री
धोबी आदि जातियों के घर के समीप जाकर चुपके से उस घर में रहनेवाले का
शब्द सुने, वहाँ जिस प्रकार का वचन सुनने में आवे उसी प्रकार अपने चिन्तित
कार्य की सिद्धि समझना। अर्थात् यदि वहाँ शुभवचन सुनने आवे तो शुभ, तथा
अशुभवचन सुनने में आवे तो अशुभ समझना ॥ २९ ॥
अथ कन्यावरणनक्षत्राणि कुलाचारपालनं चाह-
श्रुतित्रिपूवीवसुवह्निमित्रविश्वानिल भॊ वरणं कुमार्याः ।