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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 86, कुल 174 में से

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पृष्ठ 86

जीवनमें ऐसी ट्रेजेडी भी है, जिसके हाथसे मनुष्य छुट-
कारा ही चाहता है, यहां उन्होंने बिलकुल सांसारिक
व्यक्तिका मत प्रकट किया है। मेरा अपना विश्वास तो
यह है कि जो सिर्फ निष्कलंक साधु बनता है या साधु-
त्वका प्रदर्शन करता हैं, वह पाखण्डी है और वही इस
बातका प्रतिवाद कर सकता है।
जो भावुक या तत्व ज्ञानी हैं उनकी यन्त्रणा सम्पूर्ण
रूपसे निरविच्छिन्न है, यह समझना ठीक नहीं है। तत्व
ज्ञानहीनों ( abstract point of view से में उन्हें
तत्व ज्ञानहीन कहता हूं·) का भी अपना एक idealism
है। उसे वे 'पूजार्ह' समझते हैं, श्रद्धा और प्रेम करते हैं।
नाना प्रकारके दुख और यंत्रणाके साथ युद्ध करते समय
वे उसी प्रेमसागरसे साहस और भरोसा पाते हैं। यहां
मेरे साथ जिन्होंने कारावासकी यन्त्रणाभोगी है, उनमें
अनेक ऐसे हैं जो भावुक या दार्शनिक नहीं हैं। तब भी वे
शान्त भावसे यन्त्रणा सहते हैं, वीरकी तरह सहते हैं।
Technical अर्थमें वे दार्शनिक न हों पर मैं उन्हें सम्पूर्ण
रूपसे भाव विवर्जित भी नहीं समझ सकता। संभवतः संसार
में जो कर्मी हैं, उनसबके बारेमें यही बात कही जा सकती
है। सर्वसाधारणके मनमें यह धारणा है कि कैदी जब फां-