तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
सहज अवस्थामें उनके जो रूप देखे थे, समय आने-
पर दुनियाको उनका कुछ आभास दे सकूँगा ऐसी आशा
है। मेरे समान उनके बारेमें जो अनेक बातें जानते हैं,
वे कह सकनेपर भी, आज कुछ कह नहीं सकते, चुप हैं,
डर होता है कि उनके महत्वका पूर्ण परिचय न दे सकने-
की अक्षमताके कारण उन्हें सकुंचित करके न दिखा दें।
तुम जब कहते हो कि खैर कोई कष्ट नहीं है, तब मैं
तुमसे एकमत होता हूं। जीवनमें ऐसी ट्रेजडी होती
है, जैसी कि हमारे ऊपर आ गयी, किन्तु उसे मैं सानन्द
ग्रहण नहीं कर सकता। मैं इतना बड़ा तत्व-ज्ञानी या
पाखण्डी नहीं हूं कि कह सकूं कि मैं सब तरहका
दुख सहर्ष वरण कर सकता हूं। अनेक ऐसे अभागे हैं—
मुमकिन है वे भाग्यवान ही हों—जो मानो सब तरहका
दुख कष्ट भोगनेकेलिये ही पैदा हुए हैं। अधिक हो या
कम, यदि किसीको कटोरेभर दुख ही पीना पड़े तो अपने
आपको भूलकर ही पीना अच्छा है। किन्तु आत्म समर्पण
या आत्मनिवेदनका यह भाव चीनकी दीवारकी तरह सब
आघातो और कष्टोंसे रक्षा नहीं भी कर सकता है।
हां,—यह आत्म-समर्पण हमारी सहन शक्तिको बहुत
कुछ बढ़ा देता है, इसमें शक नहीं। वरटण्डने कहा है,
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