तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
बन्दी होनेपर भी उसे कष्ट नहीं है यदि उसका स्वास्थ्य
अक्षुण्ण हैं। किन्तु हमारा कष्ट तो आध्यात्मिक नहीं
है, वह शारीरिक है, आत्माके तैयार होनेपर भी शरीर
कभी-कभी दुर्बल हो जाता है।
लोकमान्य तिलकने जेलमें गीताकी समालोचना
लिखी थी और मैं निसन्देह कह सकता हूं कि जेलमें वे
भीतरसे सुखी रहे होंगे, किन्तु इसमें भी मुझे सन्देह
नहीं है कि मान्डला जेलमें छ साल तक रहनाही उनकी
अकाल मृत्युका कारण हुआ। यह मुझे मानना होगा
कि जिस निर्जनतामें मनुष्यको जेल जीवन बिताना पड़ता
है वही निर्जनता मनुष्यको बाहिरी वातावरणसे दूर कर
जीवनकी गहनतम समस्याओंपर विचार करनेका सुयोग
देती है। अपने सम्बन्धमें भी मैं कह सकता हूं कि
साल भर यहां रहनेके कारण व्यक्तिगत और समष्टिगत
अनेक समस्याओंका बहुत कुछ समाधान कर सका हूं।
जो मतामत एक समय नितान्त साधारण तौरसे प्रकट
किये जाते या सोचे जाते, आज वे स्पष्ट और अपने
पूर्ण रूपसे मेरे सामने आ गये। और किसी तरफसे
नहीं, जब तक जेलकी मीयाद खत्म नहीं होती न सही मैं
आध्यात्मिकी दृष्टिसे बहुत कुछ लाभवान हो सकूंगा।
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