तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजेल और कैदी
तुमने मेरे कारावास ग्रहणको एक प्रकारका Martyr-
dom कहा है। बेशक, यह कहना तुम्हारी गम्भीर अनुभूति
और प्राणोंके महत्वका परिचायक है। किन्तु humour
और proportion का मुझे थोड़ा बहुत ज्ञान है, इसलिये
अपनेको Martyr अनुभव करनेकी स्पर्धा नहीं करता ।
स्पर्धा या आत्मदर्पसे दूर ही रहना चाहता हूं। हां, इसमें
कितना सफल हुआ है, यह तुम्हारे जैसे मित्र ही कह
सकते हैं। Martyrdom तो मेरे लिये एक आदर्श हो
सकता है।
मेरा विश्वास है कि अधिक समय तक जेलमें रहने
केलिये सबसे बड़ी मुसीबत यही है कि उसके अन-
जानमें ही बुढ़ौती उसे आ घेरती है। इसलिये इस ओर
उसे विशेष ध्यान रखना चाहिये। तुम सोच भी नहीं
सकते कि अधिक समय तक जेलमें रहनेके कारण आदमी
कैसे शरीर और मनसे बुड्ढा हो जाता है। इसके अनेक
कारण हैं, खराब खाना व्यायाम या स्फुर्तिका अभाव,
समाजसे अलग रहना, अधीनताकी शृङ्खलाका भार, मित्रोंका
अभाव और संगीतका अभाव, संगीतका अभाव सबसे
अन्तमे उलिखित है किन्तु यह बहुत बड़ा अभाव है। अनेक
अभावोंकी पूर्ति तो मनुष्य अपने अन्तरसे कर सकता है
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