तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजेल और कैदी
इस विषयमें मुझे कुछ भी सन्देहं नहीं है कि यदि हमारे
आर्टिस्टों और साहित्यिकोंमे जेल जीवन सम्बन्धी कुछ
अभिज्ञता होती तो शिल्प और साहित्य कई अंशोंमें समृद्ध
हो जाता। काजी नजरूल इस्लामकी कविता उनके जेल
जीवनकी अभिज्ञताकी कितनी ऋणी है, शायद यह किसीने
सोचा भी नहीं।
मैं जब स्थिर भावसे सोचता हूं तो मेरे मनमे यह
धारणा स्पष्ट हो जाती है कि हमारी भावना और कष्टों-
के भीतर एक महान् उद्देश्य आपना काम कर रहा है।
और यदि यही धारणा हर घड़ी हमारे जीवनमे अपना
प्रभाव रखती तो हमारा दुख, कष्ट सब कुछ तिरोहित
हो जाता। हां ! इसी लिये तो आत्मा और शरीरमें निर-
न्तर द्वन्द चला करता है।
कैदीकी अवस्थामें रहते हुए बन्दीके हृदयमे साधारण
तया एक दार्शनिक भाव उठता है जो उसे बल प्रदान
करता है, मैंने भी वहींपर अपने खड़े होनेके लिये स्थान
बना लिया है, तथा दर्शनके विषयमें जो कुछ जाना सुना है
वह और जीवन सम्बन्धी जो मेरी धारणा है वह भी इस
समय मेरे काम आ रही है। मनुष्य यदि अपने भीतर
खोजे तो सोचने लायक बहुत-सी बातें पा सकता है,
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