तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
पुस्तकें रखना होगा, उनका Importance खूब कम है,
अच्छे अध्यापकके बिना प्राथमिक शिक्षा सफल नहीं हो
सकती। शिक्षाको सर्वप्रथम शिक्षाका Fundamental
principles समझना होगा। उसके बाद नवीन शिक्षा
प्रणाली चलायी जा सकती। उसे अपने प्रेम और सहा-
नूभूतिसे विद्यार्थियोंकी पूरी देख भाल करना होगा।
यदि शिक्षक छात्रकी अवस्थामें अपने आपको नहीं रखेगा
तो वह किस तरह छात्रोंकी Difficulty और भूल भ्रांति
समझ सकेगा। और Personality of teacher सबसे
मुख्य बात है। शिक्षाके तीन प्रधान उपादान हैं। (१)
शिक्षकका व्यक्तित्व (२) शिक्षाकी प्रणाली (३) शिक्षा-
का विषय और पाठ्य पुस्तक। शिक्षकमें व्यक्तित्व न हो
तो किसी तरहकी शिक्षा संभव नहीं हो सकती। चरित्र-
वान व्यक्तित्व सम्पन्न शिक्षक मिलनेपर हमें शिक्षाप्रणाली
निर्धारित करना होगा। योग्य शिक्षक मिले और शिक्षा
प्रणाली निर्धारित हो जाय तो किसी भी विषयकी
पुस्तक पढ़ायी जा सकती है।
आशा है तुम प्रसन्न होगे। इति
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तुम्हारा पत्र यथा समय मिला, उत्तर देनेमें बिलम्ब
हुआ, कुछ खयाल न करना। आशा करता हूं तुम मान-
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