तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
पृष्ठ 66, कुल 174 में से
संदर्भ में पढ़ेंचरित्र गठन और मानसिक उन्नति
खेल, गाना बजाना सीखते हैं, Route march करते हैं,
जत्थे बनाकर सड़कोंपर घूमते हैं, कथाच्छलसे नाना
देशोंके हाल जानते हैं। बच्चे ये न समझे कि वे लिखना
पढ़ना सीख रहे हैं, बल्कि यह समझें कि वे कहानी सुन
रहे हैं या खेल करते हैं। प्रथमावस्थामें Text Book की
बिलकुल जरूरत नही है। पेड़, पत्ते, फूलोंके बारेमें जो
कुछ बतलाया जाय वह पेड़, पौधे, फूल आदि सामने रख
कर। आकाश, तारे आदिके बारेमें जब शिक्षा दी जाय
तब मुक्त आकाशके नीचे ले जाकर। जिस चीजकी शिक्षा
दो वह सब इन्द्रियोंके सामने उपस्थित हो। भूगोल
सिखानेके समय ग्लोब, मानचित्र आदि रहना चाहिये।
इतिहास सिखलानेके समय सुविधा अनुसार म्युजियम
आदिमें ले जाना चाहिये। मामूली ढङ्गपर भी विद्यालय
हो तो गानेकी शिक्षा, Painting, drawing, garden-
ing आदि की शिक्षा देना चाहिये। असल बात यह है
कि पाठ्य वस्तुका वास्तविक ज्ञान होना चाहिये, पाठ
रट लेना उतना प्रयोजनीय नहीं है।
मैंने प्राथमिक शिक्षाके Principles या नीतिके स-
म्बन्धमें कुछ कहा। Text Book की बात ऐसे ही नहीं
कह दी। Text Book का प्रयोजन कम है ही, जो पाठ्य
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