सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 54, कुल 174 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 54

समाज-सेवा और गृह-शिल्प
लेखकों और भले आदमियोंसे किताबें संग्रह करनेका
प्रयत्न करो।
अनिलबाबूसे कहना,कि पुस्तकालयके लिये hap-haz
ardly पुस्तकें एकत्र न कर,एक method से संग्रह करें।
हां, बिना दाम जो किताबें मिलें, वे रखी जा सकती हैं।
तब भी एक प्रणाली होना चाहिये। पहले बंगला, अंग्रेजी
और यूरोपीय साहित्यके प्रसिद्ध लेखकोंकी किताबें
संग्रह करना चाहिये। इसके बाद भारतका इतिहास तथा
पृथ्वीके सब देशों'का इतिहास संग्रह करो। इसके बाद
विज्ञान सम्बन्धी पुस्तक और महापुरुषोंकी जीवनी संग्रह
करो। साथ ही साथ कृषि, राजनीति, वाणिज्य संबंधी
पुस्तकें भी संग्रह करना चाहिये। एक साथ सब तरह-
की पुस्तकें संग्रह की जा सकें तो बहुत अच्छा है। लगभग
सभी विषयों'की पुस्तकें रखना चाहिये ताकि चाहे जिस
तरहकी रुचिका आदमी हो, मांगनेपर किताब पा सके
रद्दी उपन्यास रखनेकी जरूरत नहीं है, मगर अच्छे उप-
न्यास अवश्य रखने वाहिये। यानी कम खर्चमें एक आदर्श
पुस्तकालय होना चाहिये।
❊ ❊ ❊ ❊
दूर देशसे सूत खरीदकर बहुत समयतक weaving
५३