तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
पृष्ठ 53, कुल 174 में से
संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
सीख नहीं लेता, करनेमें सकुचाता है। ऐसे काम आदमी
अपने मनसे करनेके लिये तैयार नहीं होता, किन्तु काम
सीख लेनेपर करने लगता है।
हम भिक्षुक जातिमें परिणत हो गये हैं, इसीलिये
भिक्षुककी मनोवृत्ति एक दिनमें नहीं बदल जायगी। तुम
यदि आशा करोगे कि यह मनोवृत्ति एक दिनमें बदल
जायगी तो निराश होना पड़ेगा। Social service में
असीम धैर्यकी जरूरत है।
तुम्हारा काम होना चाहिये, raw materials, जैसे
रद्दी कागज, घोंघा सीप आदिका प्रबन्ध कर देना। जो
सहायता ग्रहण करते हैं वे raw materials से माल तैयार
कर देंगे। तैयार माल बेचनेकी जिम्मेदारी तुम्हारे ऊपर
है, उसके लिये तुमलोगोंको भिन्न भिन्न दूकानदारोंके
साथ ऐसा प्रबन्ध करना चाहिये कि वे चीजोंको बेच दें।
इन सब चीजोंकी बिक्रीसे जो आय होगी, उसमें खर्चा
बाद देकर जो रकम बच रहेगी उससे आंशिक रूपसे
सहायता दानका काम चल जायेगा। Public Charity
पर हमेशा निर्भर न रहकर स्थायी आयकी व्यवस्था
करना होगा। हां, यह सब काम समय सापेक्ष और
व्ययसाध्य है। पुस्तकालयके लिये किताब न खरीदकर
५२