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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 19, कुल 174 में से

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पृष्ठ 19

तरुणके स्वप्न
जिसका अपने राष्ट्रमें विश्वास नहीं है, अपनी आत्मा
में विश्वास नहीं है, वह किस वस्तुकी सृष्टि कर सकता
है ? भारतीयमें अनेक दोष हैं, किन्तु एक गुण है जिससे
उसके सब दोष दब जाते हैं, जिसके कारण वह दुनियामें
आदमी गिना जाता है। उसमें आत्म विश्वास है, भाव
प्रवणता है, कल्पनाशक्ति है, इसीलिये वह वर्तमान जीवनकी
सभी वास्तविक त्रुटियों, अक्षमताओं, असफलताओंको अग्राह्य
कर महान् आदर्शकी कल्पना कर सकता है। उसी आदर्श
के ध्यानमे मगन हो सकता है, जो असाध्य है उसके
'साधनकी चेष्टा कर सकता है। इसी कल्पना शक्ति और
आत्मविश्वासके कारण भारतने कितनेही साधकोंको जन्म
दिया है और देगा। इसी कारण दुख, कष्ट और
अत्याचारसे उसका मेरुदण्ड कभी नहीं टूटेगा। जो
जाति आदर्शवादी है वह अपने आदर्शके लिये यंत्रणा और
क्लेशको सानन्द सह सकती है।
बहुतसे समझते हैं suffering में सिर्फ कष्ट ही है,
पर यह सच नहीं है। Suffering मे जिस प्रकार कष्ट है
उसी प्रकार अपार आनन्द भी है। किन्तु जो इस आनन्द-
को महसूस नहीं कर सकता, उसके लिये कष्ट ही कष्ट
है। वह दुःख और कष्टसे अभिभूत हो जाता है। किन्तु
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