तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसौ बातकी एक बात
जिसने दुःख और कष्टमें भो एक अनिर्वचनीय आनन्दका
आस्वाद पाया है, उसके लिये suffering गौरवकी चीज
है। वह कष्ट और यातनासे मुमूर्षु न होकर और भी
शक्तिमान् और महान हो उठता है। अब सवाल होता है,
'यह आनन्दका स्रोत कहां है ?' मैं समझतो हूं इस आनन्द
की उत्पत्ति आदर्शके प्रति अनुरागसे होती है। जो व्यक्ति
किसी महान् आदर्शको निस्वार्थ भावसे चाहनेके कारण
दुःख और यन्त्रणा पाता है, उसके लिये वह दुःख और
यन्त्रणा अर्थहीन—बेमतलब नही होती। उसके लिये तो
दुःख आनन्दके रूपमें रूपान्तरित होता है। वही आनन्द
अमृतकी तरह उसकी रग रगमें शक्तिका संचार करता
है। वही जीवनका वास्तविक अर्थ समझ सकता है,
आदर्शके चरणोंमें सर्वस्व समर्पण कर सकता है, वही
जीवन-रसका आस्वाद पा सकता है।
पिछले अप्रैलमें इनसिन जेलमें एक रसियन उपन्यास
पढ़ते पढ़ते ठीक इसी भावकी उपलब्धि हुई। उपन्यास
लेखकने रसियन जातिको लक्षकर अपने नायक द्वारा
कहा है;—There is still much suffering in store
for the people, much of their blood will yet
flow, squeezed out by the hands of greed
(