तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजेलसे निवेदन
बतलाऊं ? जिस आन्तरिक आत्मोत्सर्गका आदर्श लेकर
मैं कर्म भूमिमें अवतीर्ण हुआ था, निर्वासनकी पारसमणि
मुझे प्रतिदिन उसके लिये योग्यतर बना रही है। जो चिरं-
तन सत्य बंगालकी भागीरथी और बंगालके शस्यश्यामल
क्षेत्रोंमें मूर्त हुआ है, बंगालके जिस धर्मको बंकिमसे
लेकर देशबन्धुतकने साधना द्वारा उपलब्ध किया था,
तथा जिसका साहित्य द्वारा प्रकटीकरण किया था,
बंगालका जो भुवनमोहन रूप कितने शिल्पियों, कला-
कारों, कवियों और साहित्यिकोंकी तूलिका और लेखनी
का विषय है, आज उसका आभास पाकर मैं कृतकृत्य हूं।
देशकी इसी अनुभूतिके पुण्य प्रतापसे जेल-जीवनके ये
दो वर्ष सार्थक हुए हैं। मैं समझ सका हूं कि माकेलिये
इस प्रकार दुख, कष्टका वरण करना कितने गौरव और
सौभाग्यकी बात है।
इस प्रकारके आवेदनमें अपना परिचय देनेकी विधि
बहुत दिनसे चली आ रही है किन्तु मेरे पास ऐसा कुछ
नहीं है जिसका परिचय देकर मैं आपकी सहायता पाने-
का दावा कर सकूं। पांच वर्ष पहले जब उत्ताल महो-
दधिकी तरंगोंकी तरह भारतके प्राण भारतमाताके चरणों
मे उत्सर्ग होनेके लिये उतावले हो रहे थे, उस समय विश्व-
विद्यालयसे निकलकर मैं कर्मक्षेत्रमें आया था।
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