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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 131, कुल 174 में से

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तरुणके स्वप्न
जेलमें बन्द हूं। इन दो वर्षोंमें बहुत अनुरोध करनेपर भी
सरकारने मुझे किसी भी अदालतके सामने उपस्थित नहीं
किया। यहांतक कि अधिकारियोंके पास मेरे विरुद्ध क्या
अभियोग हैं और क्या गवाहियां हैं यह भी मुझे किसी
भी तरहसे नहीं बतलाया गया। अपने अपराधके सम्बन्ध-
में यदि मुझे कुछ कहना पड़े तो मैं यही कह सकता हूं कि
पराधीन जातिकी चिर आचरित पद्धतिको छोड़कर
कांग्रेसके एक साधारण सेवककी हैसियतसे स्वदेश
सेवामें मन प्राण अर्पण करनेका मैंने प्रयास किया है। जिसके
फलस्वरूप मैं जेलमे ही बन्द नहीं किया, बल्कि देशसे दूर
भेज दिया गया। अपनी मातृभूमिकी मिट्टी और जलसे
मुझे वञ्चित कर दिया गया। तब भी मेरे लिये
सन्तोषकी यही बात मेरा जेल जाना व्यर्थ नहीं हुआ।
आज मेरी सम्पूर्ण व्यथा रञ्जित होकर, गुलाबकी तरह
खिल गयी है। यहां आनेके पहले मैं बंगालको, भारतको
प्रेम करता था। किन्तु देशसे दूर आनेपर प्यारे बंगालको,
प्रिय भारतको हजार गुना अधिक चाहने लगा हूं।
बंगालका आकाश, बंगालकी वायु, स्वप्नप्रस्तुत, स्मृति
आच्छादित बंगालका मोहन रूप आज मेरे सामने कितना
मनोहर, कितना पवित्र, कितना सत्य है, यह मैं कैसे
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