तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
DevanagariHindipublished174 पृष्ठ
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तरुणके स्वप्न
अपने जीवनको पूर्ण रूपसे विकसित कर माताके
चरणोंमें अंजलि चढ़ा दूंगा और इसी आन्तरिक उत्सर्ग
द्वारा जीवनकी पूर्णता प्राप्त करूंगा, इसी आदर्शसे मैं
अनुप्राणित हुआ था। समाज सेवा और राजनीतिका
काम मैंने सामयिक रूपसे ग्रहण नहीं किया था। इसी-
लिये पराधीन देशके जीवनमें जो विपत और परीक्षा, दुःख
और वेदना अवश्यम्भावी है; उसके लिये शरीर और
मनसे प्रस्तुत होनेकेलिये हमेशा चेष्टा करता था। इस को-
शिशमें मैं सफल हुआ या नहीं, अथवा किस हदतक सफल
हुआ उसका विचार मेरे देशवासी करेंगे। मेरे इस क्षुद्र
किन्तु घटनापूर्ण जीवनके ऊपरसे जो जो तूफान गुजरे हैं,
उन्हीं विघ्न और विपत्तियों द्वारा मैंने अपने आपको सम-
झने और पहचाननेकी चेष्टा की है। यौवनके प्रभातमें मैंने
जिस कंटकमय पथका अवलम्बन किया, निश्चय ही उसी
पथपर अन्ततक चल सकूंगा, अज्ञात भविष्यको सामने
रखकर जिस व्रतको मैने ग्रहण किया था, उसका उद्यापन
किये बिना विरत नहीं होऊँगा। अपने प्राणों और ज्ञान-
को निचोड़कर मैंने यही सत्य प्राप्त किया है कि पराधीन
जातिका सब कुछ, शिक्षा-दीक्षा, कर्म, सब व्यर्थ है, यदि
वह स्वाधीनता प्राप्तिमे सहायक और उसके अनुकूल नहीं
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