तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
और १६२६ में इस आर्डिनेंसको बाकायदा कानून बनाने-
का आन्दोलन हुआ तो मुझे आश्चर्य न होगा। ऐसा
होनेपर मुझे स्थायी रूपसे विदेशमें रहना पड़ेगा। और
इस तरहके निर्वासनकेलिये मुझे अपने आपको ही उत्तर-
दायी मानना होगा। यदि इस सम्बन्धमें सचमुच सर-
कारको कोई इच्छा होती कि मैं कब विदेशसे लौटकर
आ सकूँगा तो उसका उल्लेख अवश्य होता।
फिर विदेशमें मैं किस हद तक स्वाधीन रहूँगा, इसका
भी स्पष्ट उल्लेख नहीं है, स्विटजरलैंडके कोने-कोनेमें जो
सी० आई० डी० घूमते हैं भारत सरकार क्या उनसे मेरी
रक्षा कर सकेगी ? यह अस्वीकार नहीं किया जा सकता
कि राजनैतिक सन्देहमें अभियुक्त होने पर म जबतक अपना
मत बदलकर सरकारी गोयन्दा नहीं हो जाता, तब तक
सरकार मुझे सन्देहकी दृष्टिसे ही देखेगी। और यह
निश्चय है कि ये सी० आई० डी० पद पदपर मेरा पीछा
करके, मेरे जीवनको दुःसह कर देंगे।
स्विट्जरलैण्डमें सिर्फ ब्रिटिश गोयन्दा ही नहीं,
बल्कि ब्रिटिश सरकार द्वारा नियुक्त स्विस, इटालियन,
फ्रेंच, जर्मन और भारतीय सी० आई० डी० भी हैं, तथा
कोई उत्साही सी० आई० डी० मुझे सरकारकी
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