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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 174 में से

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पृष्ठ 108

जेल-मुक्तिके प्रस्तावका उत्तर

हैं ? उन्होंने तो यह नहीं कहा कि मुझे घर नहीं जाने
दिया जाय या विदेश जाते समय मैं अपने आत्मीय
स्वजनोंको न देख सकूं। उन्होंने यह भी नहीं कहा
कि मैं जिस जहाजसे जाऊं'गा, वह किसी भारतीय बन्दर
पर लङ्गर न डाल सकेगा। उन्होंने यह भी नहीं कहा कि
स्वास्थ्य ठीक हो जानेपर भी जितने दिन तक आर्डिनेंस
रहेगा मैं घर नहीं लौटूंगा। इन सब बातोंको देखनेसे मैं
यही समझता हूं कि सरकारका उद्देश्य मेरे बिगड़े हुए
स्वास्थ्यको सुधारनेको व्यवस्था करना नहीं है।
मिस्टर मोबार्लीने वस्तुतः दो बातें कही हैं, (१) या
तो मैं जेलमें बन्दी रहूं (२) या किसी विदेशमें जाकर स्वा-
स्थ्य सुधारूं और अनिश्चित समय तक वहीं रहूं।
किन्तु क्या सचमुच इन दोके बीचका कोई रास्ता
बाकी नहीं बचा है ? मेरे मनमें होता है, नहीं है। सरकार-
की इच्छा है कि आर्डिनेंसकी अवधि तक यानी १६३०
तक, बन्दी रहूं। किन्तु १६३० में जब इसकी अवधि
समाप्त होगी, तब इसपर फिरसे विचार नहीं किया जाय-
गा, यह कौन कह सकता है ? पिछले अक्टुबरमें सी०
आई० डी० 'पुलिसके सर्वेसर्वा मिस्टर लोमेनके साथ मेरी
जो बातचीत हुई थी, वह बिलकुल आशाजनक नहीं है।

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