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सर्वकोश
सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)

सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)

Sampoorna Sundarkand of Ramcharitmanas

गोस्वामी तुलसीदास (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा

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पृष्ठ 72

७२ * श्रीरामचरितमानस *
आज्ञा दो। [भगवान्‌की] यह लीला (रावणवधकी तैयारी)
देखकर, बहुत-से फूल बरसाकर और हर्षित होकर देवता
आकाशसे अपने-अपने लोकको चले॥ ४॥
[दोहा ३४]
कपिपति बेगि बोलाए आए जूथप जूथ।
नाना बरन अतुल बल बानर भालु बरूथ॥
वानरराज सुग्रीवने शीघ्र ही वानरोंको बुलाया, सेनापतियोंके
समूह आ गये। वानर-भालुओंके झुंड अनेक रंगोंके हैं और उनमें
अतुलनीय बल है॥ ३४॥
प्रभु पद पंकज नावहिं सीसा।
गर्जहिं भालु महाबल कीसा॥
देखी राम सकल कपि सेना।
चितइ कृपा करि राजिव नैना॥ १॥
वे प्रभुके चरणकमलोंमें सिर नवाते हैं। महान् बलवान् रीछ
और वानर गरज रहे हैं। श्रीरामजीने वानरोंकी सारी सेना देखी।
तब कमलनेत्रोंसे कृपापूर्वक उनकी ओर दृष्टि डाली॥ १॥
राम कृपा बल पाइ कपिंदा।
भए पच्छजुत मनहुँ गिरिंदा॥
हरषि राम तब कीन्ह पयाना।
सगुन भए सुंदर सुभ नाना॥ २॥
रामकृपाका बल पाकर श्रेष्ठ वानर मानो पंखवाले बड़े पर्वत
हो गये। तब श्रीरामजीने हर्षित होकर प्रस्थान (कूच) किया।
अनेक सुन्दर और शुभ शकुन हुए॥ २॥