सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)
Sampoorna Sundarkand of Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२ * श्रीरामचरितमानस *
गयउ दसानन मंदिर माहीं।
अति बिचित्र कहि जात सो नाहीं॥ ३॥
उन्होंने एक-एक (प्रत्येक) महलकी खोज की। जहाँ-तहाँ
असंख्य योद्धा देखे। फिर वे रावणके महलमें गये। वह अत्यन्त
विचित्र था, जिसका वर्णन नहीं हो सकता॥ ३॥
सयन किएँ देखा कपि तेही।
मंदिर महुँ न दीखि बैदेही॥
भवन एक पुनि दीख सुहावा।
हरि मंदिर तहँ भिन्न बनावा॥ ४॥
हनुमान्जीने उस (रावण)-को शयन किये देखा; परन्तु
महलमें जानकीजी नहीं दिखायी दीं। फिर एक सुन्दर महल
दिखायी दिया। वहाँ (उसमें) भगवान्का एक अलग मन्दिर बना
हुआ था॥ ४॥
[दोहा ५]
रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ।
नव तुलसिका बृंद तहँ देखि हरष कपिराइ॥
वह महल श्रीरामजीके आयुध (धनुष-बाण)-के चिह्नोंसे
अङ्कित था, उसकी शोभा वर्णन नहीं की जा सकती। वहाँ नवीन-
नवीन तुलसीके वृक्ष-समूहोंको देखकर कपिराज श्रीहनुमान्जी
हर्षित हुए॥ ५॥
लंका निसिचर निकर निवासा।
इहाँ कहाँ सज्जन कर बासा॥
मन महुँ तरक करैं कपि लागा।
तेहीं समय बिभीषनु जागा॥ १॥