सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)

सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)
Sampoorna Sundarkand of Ramcharitmanas
गोस्वामी तुलसीदास (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा
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१२४ * श्रीरामचरितमानस *
चौंकि महा मुनि साप दियो तब
चाहिय कौन बिचार बिचारो॥
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु
सो तुम दास के सोक निवारो।
को नहिं जानत है जगमें कपि
संकटमोचन नाम तिहारो॥२॥
अंगद के सँग लेन गये सिय
खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु
बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो॥
हेरि थके तट सिंधु सबै तब लाय
सिया-सुधि प्रान उबारो।
को नहिं जानत है जगमें कपि
संकटमोचन नाम तिहारो॥३॥
रावन त्रास दई सिय को सब
राक्षसि सों कहि सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु
जाय महा रजनीचर मारो॥
चाहत सीय असोक सों आगि सु
दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।