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सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)

सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)

Sampoorna Sundarkand of Ramcharitmanas

गोस्वामी तुलसीदास (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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पृष्ठ 125
  • संकटमोचन हनुमानाष्टक * १२५
    को नहिं जानत है जगमें कपि
    संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ४ ॥
    बान लग्यो उर लछिमन के तब
    प्रान तजे सुत रावन मारो।
    लै गृह बैद्य सुषेन समेत
    तबै गिरि द्रोन सु बीर उपारो॥
    आनि सजीवन हाथ दई तब
    लछिमन के तुम प्रान उबारो।
    को नहिं जानत है जगमें कपि
    संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ५ ॥
    रावन जुद्ध अजान कियो तब
    नाग कि फाँस सबै सिर डारो।
    श्रीरघुनाथ समेत सबै दल
    मोह भयो यह संकट भारो॥
    आनि खगेस तबै हनुमान जु
    बंधन काटि सुत्रास निवारो।
    को नहिं जानत है जगमें कपि
    संकटमोचन नाम तिहारो ॥ ६ ॥
    बंधु समेत जबै अहिरावन
    लै रघुनाथ पताल सिधारो।