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सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)

सम्पूर्ण सुन्दरकाण्ड (श्रीरामचरितमानस पंचम सोपान - गीताप्रेस गोरखपुर सविस्तार सटीक)

Sampoorna Sundarkand of Ramcharitmanas

गोस्वामी तुलसीदास (गीताप्रेस गोरखपुर) द्वारा

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पृष्ठ 123
  • संकटमोचन हनुमानाष्टक * १२३
    जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा।
    होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
    तुलसीदास सदा हरि चेरा।
    कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
    [दोहा]
    पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
    राम लषन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
    ॥ इति ॥
    संकटमोचन हनुमानाष्टक
    मत्तगयन्द छन्द
    बाल समय रबि भक्षि लियो तब
    तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
    ताहि सों त्रास भयो जग को
    यह संकट काहु सों जात न टारो॥
    देवन आनि करी बिनती तब
    छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।
    को नहिं जानत है जगमें कपि
    संकटमोचन नाम तिहारो॥ १॥
    बालि की त्रास कपीस बसै गिरि
    जात महाप्रभु पंथ निहारो।