सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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४८ ] ।। सुन्दर विलास ।।
देस देस ही के लोक आइकै हजूरि होहि,
बैठि करि तखत कहावै सुलतान है ।
सुन्दर कहत जब चेतना सकति गई,
उहै देह ताकी कोऊ मानत न आन है ॥११॥
।। इति देहात्म बिछोह को अंग सम्पूर्णं ।।
(११) तमास-तमाशा, अचम्भे की बात ।