सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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॥ देहात्म विछोह को अंग ॥ [ ४७
देह कौ बियोग जब देखत ही होइ गयौ.
तब कोऊ कहै कहा जाइ कै समाई है ।
पण्डित रिषीश्वर तपीश्वर मुनीश्वर ऊ,
सुन्दर कहत यह किनहू न पाई है ॥६॥
तबहि लौ क्रिया सब होत है विविध भांति,
जब लग घट माहि चेतन प्रकास है ।
देह कै अशक्त भये क्रिया सब थकि जात,
जब लग श्वास चलै तब लग आश है ॥
श्वासऊ थक्यौ है जब रोवन लगे है तब,
सब कोऊ कहैं यह भयौ घट नास है ।
काहू नहिं देख्यौ किंहि और कौन कहा गयौ,
सुन्दर कहत यह बडौई तमास है ॥१०॥
देह तौ सुरूप तौलौ जौलौ है अरूप माहि,
सब कोऊ आदर करत सनमान है ।
टेढी पाग बाधि वार वार ही मरोरै मूछ,
बाहु उसकारै अति धरत गुमान है ॥
(१०) असक्त-अशक्त, असमर्थ ।