सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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४४ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
मात पिता जुवती सुत वधव,
लागत हैं सब कौ अति प्यारे ।
लोग कुटुम्ब खरौ हित राखत,
होइ नहीं हमतें कहु न्यारो ॥
देह सनेह तहा लग जानहु,
बोलत है मुख शब्द उचारो ।
सुन्दर चेतनि शक्ति गई जब,
वेगि कहै घर माहि निकारो ॥३॥
रूप भलौ तब ही लग दीसत,
जौलंग बोलत चालत आगै ।
पीवत खात सुनै अरु देखत,
सोइ रहै उठिकै पुनि जागै ।
मात पिता भइया मिलि बैठत,
प्यार करं जुवती गर लागै ।
सुन्दर चेतनि शक्ति गई जब,
देखत ताहि सबै डरि भागै ॥४॥
मनहर छंद
कौन भांति करतार कियौ है शरीर यह,
पावक कै मध्य देखौ पानी कौ जमावनौ ।
नासिका श्रवन नैन बदन रसन बैन,
हाथ पाव अंग नख सिख कौ बनावनौ ॥
(३) जुवती-युवती, स्त्री ।