सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

पृष्ठ 167, कुल 284 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 167

१५८ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
सुन्दर कहै सीख सुनि मेरी,
अब तूं घर घर फिरबौ छाड ॥२७॥
पंथो माँहि पथ चलि आयौ,
सो वह पथ लख्यौ नहि जाइ ।
वाही पंथ चल्यौ उठि पंथी,
निर्भय देश पहूच्यौ आइ ।
तहा दुकाल परै नहिं कबहूं,
सदा सुभिक्ष रह्यौ ठहराइ ।
सुन्दर दुखी न कोऊ दीसै,
अक्षय सुख मैं रहै समाइ ॥२८॥
एक अहेरी बन मै आयौ,
खेलन लागौ भली शिकार ।
कर मैं धनुष कमर मै तरकस,
सावज घेरे बारवार ॥
मार्यौ सिंघ व्याघ्र पुनि मार्यौ,
मारी बहुरि मृगनि की डार ।
ऐसै सकल मारि घर ल्यायौ,
सुन्दर राज हे कियौ जुहार ॥२६॥