सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
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१५६ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
नाइकनी पुनि हरषत डोलै,
मोहि मिल्यौ नीकौ भरतार ।
पूंजी जाइ साह कौं सौपो,
सुन्दर सिरतै उत्र्या भार ॥२२॥
बनिक एक बनजी कौं आयौ,
परै तावरा भारी भैंठि ।
भली बस्तु कछु लीनी दीनी,
खैचि गठरिया बांधी ऐठि ॥
सौदा कियौ चल्यौ पुनि घर कौ,
लेखा कियौ बरीतर बैठि ।
सुन्दर साह खुसी अति हूवा,
बैल गया पूंजी मैं पैठि ॥२३॥
पहरायत घर मुस्यौ शाह कौ,
रक्षा करनै लाग्यौ चोर ।
कोतवाल काठौ करि बाध्यौ,
छूटै नही साझ अरु भोर ॥
राजा गाव छोडि करि भागौ,
हूवो सकल जगत मैं शोर ।
परजा सुखी भई नगरी मैं,
सुन्दर कोई जुलम न जोर ॥२४॥