सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
पृष्ठ 156, कुल 284 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 156
॥ भक्ति ज्ञान मिश्रित को अंग ॥ [ १४७
दूरि हु राम नजीक हु राम हि,
देश हु राम प्रदेश हु रामै ।
पूरब राम हि पच्छिम राम हि,
दक्षिण राम हि उत्तर धामै ॥
आगैहु राम हि पीछैहु राम हि,
व्यापक राम हि है वन ग्रामै ।
सुन्दर राम दसौं दिसि पूरन,
सुरगहु राम पतालहु तामै ॥५॥
आप हु राम उपावत राम हि,
भंजन राम सवारन रामै ।
दृष्टि हु राम अदृष्टि हु राम हि,
इष्ट हु राम करै सब कामै ॥
वर्ण हु राम अवर्ण हु राम हि,
रक्त न पीत न श्वेत न श्यामै ।
सुनिहु राम अमुनि हु राम हि,
सुन्दर राम हि नाम अनामै ॥६॥
॥ इति भक्ति ज्ञान मिश्रित को अंग ॥
(५) सुरग-स्वर्ग । (६) उपावत-उत्पन्न करने वाले ।
भंजन-मिटाने वाले । सवारन-सुधारने वाले, रक्षा करने
वाले ।