सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

पृष्ठ 155, कुल 284 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 155

१४६ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
भूमिहु राम ही आपहु रामै हि,
तेज हु राम हि वायु हु रामै ।
व्योमहु राम हि चदहु राम हि,
सूरहु राम हि शीत न घामै ॥
आदिहु रामहि अतहु राम हि,
मध्य हु राम हि पु स न बामै ॥
आजहु रामहि कालहु राम हि,
सुन्दर रामहि म्हा महि थामै ॥३॥
देख हु राम अदेख हु राम हि,
लेख हु राम अलेख हु रामै ।
एक हु राम अनेक हु राम हि,
शेषहु राम अशेष हु तामै ॥
मौन हू राम अमौनहु राम हि,
गौनहु राम हि भौनहु ठामै ।
बाहिर राम हि भीतर राम हि,
सुन्दर रामहि है जग जामै ॥४॥
(३) पुस-पुरुष। वामै-स्त्री। म्हामहि-हम सब मे।
थामैं-तुम सब मे।