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सर्वकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 153

१४४ ] ॥ सुन्दर विलास ॥
और देवी देव हू उपासना अनेक भांति,
शक सब दूरि करि तिनतै न डरि हैं ॥
सब ही के सीस पर पाव दे मुकति होइ,
सुन्दर कहत सो तौ जनमै न मरि हैं ।
मन बच काय करि अंतरि न राखै कछु,
सतनि की सेवा करै सोई निसतरि है ॥३०॥
॥ इति साधु को अंग सम्पूर्ण ॥
(३०) मुकति-मुक्त । अन्तर-भेद, फर्क ।