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सर्वकोश
स्मृतिचन्द्रिका: व्यवहारकाण्ड (देवण्णभट्ट - दक्षिण भारत का मूर्धन्य न्याय-दर्शन महाग्रन्थ)

स्मृतिचन्द्रिका: व्यवहारकाण्ड (देवण्णभट्ट - दक्षिण भारत का मूर्धन्य न्याय-दर्शन महाग्रन्थ)

Smritichandrika: Vyavaharakanda of Devannabhatta

देवण्णभट्ट (सम्पादक: एल. श्रीनिवासाचार्य) द्वारा

DevanagariSanskritpublished474 पृष्ठ

पृष्ठ 76, कुल 474 में से

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पृष्ठ 76

६७(67) or६८(68) or६५(65)? Let's look at the shape:६and then५(looks like५in old Devanagari, or७or८? No, it's ६५(65). Let's write६५` as the page number.

  • Header middle: स्मृ (Smri) with a line above it, and १ or । on the right. Let's write ६५ on the left, स्मृ in the middle, and । on the right.
  1. Line-by-Line Transcription:
    • ६५ स्मृ । (Header)
    • इति । एवं ब्रह्मचर्यादेरपि द्रष्टव्यम् । अत एव स्मृत्य-
    • न्तरं—
    • एकादश्यां न भुञ्जीत पक्षयोरुभयोरपि ।
    • ब्रह्मचारी च नारी च शुक्लामेव सदा गृही ॥
    • इति । गृही पुत्रवानिति शेषः, तस्य कृष्णैकादश्यामुपवा-
    • सनिषेधस्मरणात्—